Tuesday, 29 July 2014

विवाह संबंधी अपराध

                                                               विवाह संबंधी अपराध

धारा 493: यदि पुरुष द्रारा उस स्त्री को , जो उससे कानून के अनुसार विवाहित नहीं हैँ , उसे छल कपट  द्रारा  यह विश्वास कराकर कि वह उससे विवाहित हैँ , उस विश्वास के साथ उससे सहवास करना दस वर्ष के कारावास और जुर्माना से दण्डनीय अपराध हैँ । इस असज्ञेय एव अजमानतीय मामले का विचरण प्रथम वर्ग मैजिस्ट्रेट द्रारा  किया जाता हैँ
धारा 494: यदि कोई पति या पत्नी के जीवन काल मे अर्थात  उनके जीवित रहते दूसरा विवाह कर लेता हैँ ,तो इस अपराध के लिए सात वर्ष के कारावास और जुर्माना के दण्ड का प्रावधान हैँ  ।  इस असज्ञेय एव जमानतीय मामले का विचरण प्रथम वर्ग मैजिस्ट्रेट कर सकता  हैँ ।
धारा 495 : यदि कोई व्यक्ति अपने पिछले विवाह को उस व्यक्ति से छिपाकर रखता  हैँ , जिसके साथ उसने बाद मे विवाह किया  हैँ , तो इस अपराध के लिए दस वर्ष के कारावास और जुर्माना का प्रावधान  हैँ । इस असज्ञेय एव जमानतीय मामले का विचारण प्रथम वर्ग मैजिस्ट्रेट कर सकता  हैँ ।
धारा 496: कपट करने के उदेश्य से विवाहित होने के कर्म को यह जानते हुए किसी व्यक्ति द्रारा पूरा किया जाना कि ऐसा लगे वह विधिपूर्वक विवाहित नहीं हुआ हैँ  अर्थात विवाहित होते हुआ अविवाहित होने का प्रदर्शन करना ऐसा अपराध हैँ , जिसके लिए साथ वर्ष के कारावास और जुर्माना के दण्ड का प्रावधान हैँ । इस असज्ञेय एव जमानतीय मामले का विचारण प्रथम वर्ग मैजिस्ट्रेट कर सकता हैँ ।
धारा 497: जारकर्म । यदि किसी विवाहित स्त्री के साथ उसकी बिना सहमति से सहवास  किया जाए और सहवास करने वाला व्यक्ति उसका पति न हो , तो वह अपराध पाच वर्ष के कारावास या जुर्माना या दोनों से दण्डनीय हैँ । इस असज्ञेय एव जमानतीय मामले का विचारण प्रथम वर्ग मैजिस्ट्रेट कर सकता हैँ ।
धारा 498 : विवाहित स्त्री को अपराध करने के उदेश्य से बहलाकर  ले जाना और उसे विधि विरूद्ध अपने पास बनाए रखने का अपराध दो वर्ष के कारावास या जुर्माना अथवा दोनों से दण्डनीय हैँ । इस असज्ञेय एव जमानतीय मामले का विचारण प्रथम वर्ग मैजिस्ट्रेट कर सकता हैँ ।

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