Friday, 5 February 2016

इलाहाबाद हाइकोर्ट लखनऊ बेंच लखनऊ

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आरटीआई लिखने का तरीका एवं सूचना का अधिकार (Right to Information Act)

आरटीआई लिखने का तरीका -

RTI मलतब सूचना का अधिकार - ये कानून
हमारे देश मे 2005 मे लागू हुआ| जिस का उपयोग
कर के आप सरकार और
किसी भी विभाग से
सूचना मांग सकते है आम तौर पर
लोगो को इतना ही पता होता है| परंतु आज मैं
आप को इस के बारे मे कुछ ओर रोचक
जानकारी देता हूँ -
आरटीआई से आप सरकार से कोई
भी सवाल पूछ
कर सूचना ले सकते है
आरटीआई से आप सरकार के
किसी भी दस्तावेज़
की जांच कर सकते है
आरटीआई से आप दस्तावेज़ या Document
की प्रमाणित Copy ले सकते है
आरटीआई से आप सरकारी काम काज
मे इस्तमल
सामग्री का नमूना ले सकते है
आरटीआई से आप
किसी भी कामकाज
का निरीक्षण कर सकते है
कुछ लोगो का सवाल मुझे मैसेज मे
आया कि आरटीआई मे कौन- कौन
सी धारा हमारे काम की है तो उस
का जवाब
भी मैं यहाँ लिख देता हूँ -
धारा 6 (1) - आरटीआई का application
लिखने का धारा है
धारा 6 (3) - अगर आप की application गलत
विभाग मे चली गयी है तो गलत विभाग
इस
को 6 (3) धारा के अंतर्गत सही विभाग मे 5
दिन के अंदर भेज देगा
धारा 7(5) - इस धारा के अनुसार BPL कार्ड
वालों को कोई आरटीआई शुल्क
नही देना होता
धारा 7 (6) - इस धारा के अनुसार अगर
आरटीआई का जवाब 30 दिन मे
नही आता है
तो सूचना फ्री मे दी जाएगी
धारा 18 - अगर कोई अधिकारी जवाब
नही देता तो उस की शिकायत
सूचना अधिकारी को दी जाए
धारा 8 - इस के अनुसार वो सूचना आरटीआई मे
नही दी जाएगी जो देश
की अखंडता और
सुरक्षा के लिए खतरा हो या विभाग
की आंतरिक जांच को प्रभावित करती हो
धारा 19 (1) - अगर आप
की आरटीआई
का जवाब 30 दिन मे नही आता है तो इस
धारा के अनुसार आप प्रथम अपील
अधिकारी को प्रथम अपील कर सकते
हो
धारा 19 (3) - अगर आप की प्रथम
अपील
का भी जवाब नही आता है तो आप
इस
धारा की मदद से 90 दिन के अंदर 2nd
अपील
अधिकारी को अपील कर सकते हो
अब किसी ने पूछा था कि आरटीआई
कैसे लिखे
-
इस के लिए आप एक साधा पेपर ले और उस मे1 इंच
की कोने से जगह छोड़े और नीचे दिए
गए प्रारूप मे
अपने आरटीआई लिख ले
.............................................
.............................
.............................................
.............................
सूचना का अधिकार 2005 की धारा 6(1) और
6(3) के अंतर्गत आवेदन
सेवा मे
(अधिकारी का पद)/ जन सूचना अधिकारी
विभाग का नाम
विषय - आरटीआई act 2005 के
अंतर्गत ...............
... से संबधित सूचनाए
1- अपने सवाल यहाँ लिखे
2-
3
4
मैं आवेदन फीस के रूपमें 10रूका पोस्टल
ऑर्डर ........ संख्या अलग से जमा कर रहा /
रही हूं।
या
मैं बी.पी.एल. कार्ड
धारी हूं इसलिए सभी देय
शुल्कों से मुक्त हूं। मेरा बी.पी.एल.
कार्ड
नं..............है।
यदि मांगी गई सूचना आपके विभाग/
कार्यालय से सम्बंधित
नहीं हो तो सूचना का अधिकार अधिनियम,
2005 की धारा 6 (3) का संज्ञान लेते हुए
मेरा आवेदन सम्बंधित लोक
सूचना अधिकारी को पांच दिनों के
समयाविध् के अन्तर्गत हस्तान्तरित करें। साथ
ही अधिनियम के प्रावधानों के तहत
सूचना उपलब्ध् कराते समय प्रथम अपील
अधिकारी का नाम व पता अवश्य बतायें।
भवदीय
नाम:
पता:
फोन नं:
.............................................
.............................
.............................................
.............................
ये सब लिखने के बाद अपने Sign कर दे
अब मित्रो केंद्र से सूचना मांगने के लिए आप 10
रुदेते है और एक पेपर की कॉपी मांगने
के 2 रुदेते है
और हर राज्य का आरटीआई शुल्क अगल अलग
है
जिस का पता आप कर सकते हे





सूचना का अधिकार (Right to Information Act):

 सरकारी पैसा,कामकाज और सूचना पाना जो पहले कभी ना-मुमकिन हुआ करता था आज हर आदमी के बस की बात हो चुका है.

इस अधिकार को ना केवल आम आदमी बल्कि गरीबी की रेखा के नीचे रहने वाल हर शख्स कर स्कता है और अपने हक के बारे में जानकारी और आँकड़े जुटा सकता है.

लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी होता है इस अधिकार को जन-साधारण त पहुँचाने और उनको उनके अधिकारों के बारे में इंगित करने की.तो आइये पहले हम खुद ही इस बारें में पता लगाते हैं कि क्या है ये सूचना का अधिकार और कैसे ये आम आदमी का अधिकार है

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005

सूचना का अधिकार अधिनियम (Right to Information Act) भारत के संसद द्वारा पारित एक कानून है जो 12 अक्तूबर, 2005 को लागू हुआ (15 जून, 2005 को इसके कानून बनने के 120 वें दिन)। भारत में भ्रटाचार को रोकने और समाप्त करने के लिये इसे बहुत ही प्रभावी कदम बताया जाता है। इस नियम के द्वारा भारत के सभी नागरिकों को सरकारी रेकार्डों और प्रपत्रों में दर्ज सूचना को देखने और उसे प्राप्त करने का अधिकार प्रदान किया गया है। जम्मू एवं काश्मीर को छोडकर भारत के सभी भागों में यह अधिनियम लागू है।

सूचनाऍ कहाँ से मिलेगी ? 

-केन्द्र सरकार,राज्य सरकार व स्थानीय प्रशासन के हर कार्यालय में लोक सूचना अधिकारियों को नामित किया गया है। 
-लोक सूचना अधिकारी की जिम्मेदारी है कि वह जनता को सूचना उपलब्ध कराएं एवं आवेदन लिखने में उसकी मदद करें.

कौन सी सूचनाऍ नही मिलेंगी ? 

-जो भारत की प्रभुता, अखण्डता, सुरक्षा, वैज्ञानिक या आर्थिक हितों व विदेशी संबंधों के लिए घातक हो.

-जिससे आपराधिक जाँच पड़ताल,अपराधियों की गिरफ्तारी या उन पर मुकदमा चलाने में रुकावट पैदा हो.
-जिससे किसी व्यक्ति के जीवन या शारीरिक सुरक्षा खतरे में पड
-जिससे किसी व्यक्ति के निजी जिन्दगी में दखल-अंदाजी हो और उसका जनहीत से कोई लेना देना ना हो.

स्वयं प्रकाशित की जाने वाली सूचनाऍ कौन सी है ? 

-हर सरकारी कार्यालय की यह जिम्मेदारी है कि वह अपने विभाग के विषय में निम्नलिखित सूचनाऍ जनता को स्वयं दें 

-अपने विभाग के कार्यो और कर्तव्यों का विवरण । 
-अधिकारी एवं कर्मचारियों के नाम, शक्तियाँ एवं वेतन । 
-विभाग के दस्तावेजों की सूची । 
-विभाग का बजट एवं खर्च की व्यौरा । 
-लाभार्थियों की सूची, रियायतें और परमिट लेने वालों का व्यौरा। 
-लोक सूचना अधिकारी का नाम व पता

सूचना पाने की प्रक्रिया क्या है?

-सूचना पाने के लिए सरकारी कार्यालय में नियुक्त लोक सूचना अधिकारी के पास आवेदन जमा करें । आवेदन पत्र जमा करने की पावती जरुर लें । 
-आवेदन पत्र के साथ निर्धारित फीस देना जरुरी है । 
-प्रतिलिपि/नमूना इत्यादि के रुप मे सूचना पाने के लिए निर्धारित शुल्क देना जरुरी है

सूचना देने की अवधि क्या है ? 

सूचनाऍ निर्धारित समय में प्राप्त होंगी 
-साधारण समस्या से संबंधित आवेदन 30 दिन 
-जीवन/स्वतंत्रता से संबंधित आवेदन 48 घंटे 
-तृतीय पक्ष 40 दिन 
-मानव अधिकार के हनन संबंधित आवेदन 45 दिन 

सूचना पाने के लिए आवेदन कैसे बनाऍ ?

-लोक सूचना अधिकारी, विभाग का नाम एवं पता । 
-आवेदक का नाम एवं पता । 
-चाही गई जानकारी का विषय । 
-चाही गई जानकारी की अवधि । 
-चाही गई जानकारी का सम्पू्र्ण विवरण । 
-जानकारी कैसे प्राप्त करना चाहेंगे-प्रतिलिपि /नमूना/लिखित/निरिक्षण । 
-गरीबी रेखा के नीचे आने वाले आवेदक सबूत लगाएं । 
-आवेदन शुल्क का व्यौरा-नकद, बैंक ड्राफ्ट, बैंकर्स चैक या पोस्टल ऑडर । 
-आवेदक के हस्ताक्षर, दिनांक ।

सूचना न मिलने पर क्या करे ? 
-यदि आपको समय सीमा में सूचना नहीं मिलती है, तब आप अपनी पहली अपील विभाग के अपीलीय अधिकारी को, सूचना न मिलने के 30 दिनों के अन्दर , कर सकते हैं । 
-निर्धारित समय सीमा में सूचना न मिलने पर आप राज्य या केन्द्रीय सूचना आयोग को सीधा शिकायत भी कर सकते हैं । 
-अगर आप पहली अपील से असंतुष्ट है तब आप दूसरी अपील के फैसले के 90 दिनों के अन्दर राज्य या केन्द्रीय सूचना आयोग को कर सकते हैं ।

सूचना न देने पर क्या सजा है ? 

लोक सूचना अधिकारी आवेदन लेने से इंकार करता है, सूचना देने से मना करता है या जानबुझकर गलत सूचना देता है तो उस पर प्रतिदिन रु. 250 के हिसाब से व कुल रु. 25,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है 

अपील कैसे करे ? 


-अपीलीय अधिकारी, विभाग का नाम एव पता।
-लोक सूचना अधिकारी जिसके विरुद्ध अपील कर रहे हैं उसका नाम व पता । 
-आदेश का विवरण जिसके विरुद्ध अपील कर रहे हैं । 
-अपील का विषय एवं विवरण । 
-अपीलीय अधिकारी से किस तरह की मदद चाहते हैं । 
-किस आधार पर मदद चाहते हैं । 
-अपीलार्थी का नाम, हस्ताक्षर एवं पता । 
-आदेश , फीस, आवेदन से संबंधित सारे कागजात की प्रतिलिपि 

सूचना पाने के लिए निर्धारित शुल्क 

विवरण केन्द्र सरकार 


आवेदन शुल्क रु. 10/- 

अन्य शुल्क ए-4 या ए-3 के कागज के लिए रु. 2/ प्रति पेज
बड़े आकार का कागज/नमूना के लिए वास्तविक मूल्य
फ्लापी या सीडी के लिए रु. 50/-

रिकार्ड निरिक्षण का शुल्क पहला घंटा -नि.शुल्क, तत्पश्चात हर घंटे के लिए रु. 5/-

अदायगी नकद / बैंक ड्राफ्ट / बैंकर्स चैक / पोस्टल आडर्र के रुप में


नोट: गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों को कोई शुल्क नही देना पड़ता हैं


ज्यादा जानकारी के लिये पता है और वेबसाईट भी है

केन्द्र सूचना आयोग ब्लाँक न. 4, पाँचवी मंजिल, पुराना जे.एन.यू. कैम्पस,
http://www.cic.gov.in/
नई दिल्ली-110 067, वेबसाइट:cic.gov.in , फोन/फैक्स -011-26717354