Tuesday, 30 December 2014

लोक आयुक्त कुप्रशासन, भ्रष्टाचार के विरुद्ध नि: शुल्क निदान

                        लोक आयुक्त
कुप्रशासन, भ्रष्टाचार के विरुद्ध नि: शुल्क निदान



लोक आयुक्त उत्तर प्रदेश कुप्रशासन एव लोक सेवको के विरुद्ध भ्रष्टाचार के मामले पर प्रस्तुत की जाने वाली शिकायतों को ग्रहण करके उनका निराकरण कराते हुए उत्तरदायी लोक सेवाओ के विरुद्ध कार्यवाई किये जाने हेतु सस्तुतिया शासन को प्रेषित करता हैँ  ।
क्षेत्राधिकार - शासन के समस्त विभाग, स्थानीय निकाय, विकास प्राधिकरण, सरकारी कंपनियाँ, सहायक कंपनियाँ, निगम सोसाइटियों व परिषदों से सम्बन्धित शिकायतों के मामले ।
उदाहरणार्थ- लोक सेवको के कुप्रशासन , भ्रष्टाचार एव पद के दुरुपयोग आदि से सबधित मामले तथा सेवान्रिव्रती देयो के भुगतान , मृंतक आश्रित सेवायोजन, निराश्रित एव व्रद्ध महिलाओ के पेंशन , अनुसूचित जाति एव जनजातियो के आरक्षन संबंधी मामले ।

शिकायत तथा अभिकथन कैसे करे ?

अभिकथन / शिकयात हेतु शिकायतकर्ता को निर्धारित प्रपत्र पर शिकायत टकित कराकर तीन प्रतियो मे शिकायती मामले पर नोटरी द्रारा सत्यापित शपथपत्र के साथ प्रस्तुत किया जाने का प्रावधान हे । लोकसेवकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार की शिकायते अभिकथन रूपी शिकायते हैँ  ऐसी शिकायतो के साथ एक हजार रुपये की धनराशि जमानत के रूप मे निर्धारित शीर्षक "8443 - सिविल निक्षेप" के अंतर्गत स्टेट बैंक तथा कोषागार मे जमा करके चालान की मूल प्रति सलग्न की जानी चाहिऐ । अधिक जनिकारी हेतु संपर्क करे -
लोक आयुक्त कार्यालय उत्तर प्रदेश 
14- बी, माल एवेन्यु, लाल बहादुर शास्त्री मार्ग, लखनऊ
पो. बॉक्स स.172,जी.पी.ओ. लखनऊ, पिन कोड़ 226001
दूरभाष: 2236155,2236486
फ़ैक्स - (0522) 2236456
वेबसाइट : www.lokayukt.up.nic.in

ई - मेल : lokayukta@hotmail.com




अगर कोई रिश्वत मागे तो सीबीआई को दे जानकारी

गर सरकारी बैंक और केंद्र सरकार के उपक्रम का कोई अधिकारी अगर कोई रिश्वत मागे तो सीबीआई को दे जानकारी


भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरे देश मे  क्रांति की धूम मची हैँ  । इस बीच सीबीआई ने भी रिश्वतखोरी के खिलाफ एक नई पहल की हैँ  । अगर कोई रिश्वत मांग रहा हैँ  तो इसकी सूचना उन्हे दे जाये ।
एस०पी० सीबीआई ने अपील की हैँ । कि अगर केंद्र सरकार सरकारी बैंक और केंद्र सरकार के उपक्रम का कोई अधिकारी उनसे किसी कार्य के एवज मे रिश्वत मांगे तो फोन और एसएमएस करे । सीबीआई ने फोन करने के लिए 0522-2201459 तथा 2622985 तथा एसएमएस के लिए 9415012635 नंबर भी दिये हैँ  । भ्रष्टाचार के खिलाफ सीबीआई कि यह मुहिम पूरे देश मे चल रही  हैँ  ।
सीबीआई के उच्चाधिकारियों के निर्देश पर सीबीआई के भ्रष्टाचार  निवारण सगठन मे एक सेल बनाया गया हैँ  , जो लोगो द्रारा फोन से मिली शिकायतों और एसएमएस का ब्यौरा तैयार करेगा ओर उस पर त्वरित कार्यवाही के लिए एस०पी० के अनुमोदन के बाद टीम भेजी जायेगी /

ग्राम सभा कि जमीन पर कब्जा किसका और कब से जायज माना जायेगा

ग्राम सभा कि जमीन पर कब्जा किसका और कब से जायज माना जायेगा

नये भू- सुधार कानून के अंन्तर्गत अब कोई भी व्यक्ति ग्राम समाज कि जमीन पर कब्जा नहीं कर सकेगा और वह कब्जे के आधार पर आसामी सीरदार या भूमिधर घोषित नहीं किया जा सकेगा । किन्तु ऐसे खेतिहर मजदूर जो ऐसी अनुसूचित जाति या जनजाति के सदस्य हे ।
उन्होने ऐसी जमीन पर जो किसी चारागाह तालाब सिंघाण्डा उगाने नदी का किनारा या जिसे राज्य सरकार द्रारा बजट किसी अन्य कार्य हेतु निर्धारित की गई हो ग्राम बागान या पब्लिक पर्पज या मिलेट्री, नहर , रेलवे किसी फार्म या टाउन एरिया द्रारा अधिकृत की गई हो , ग्राम के अलावा गाव की दीगर भूमि हैँ , एव 30 जून 1985 की तिथि तक उसका कब्जा हैँ  । तो ऐसे व्यक्ति के खिलाफ वेदखली का कोई भी कार्यवाही नहीं की जा सकेगी । ग्राम समाज की जमीन पर अवैध कब्जे के बारे मे शिकायत के लिए निम्म मो0 नंम्बर पर सम्पर्क करे - 9451309942, सुबह 10 बजे से साय 4.00 बजे 
तक सोमवार से शुक्रवार तक ।
ज़मीन बटाई या पटटे पर कौन दे सकते हैँ  ।
जिन काशतकारो को कानून मे अपनी ज़मीन को लगान (बटाई) पर उठाने की छूट दी गई हैँ  उसका विवरण इस प्रकार हैँ  ।
1 धारा 157 (1) (क) : स्त्री वह  स्त्रियाँ जो आविवाहित हो या विवाहित हो , पति के साथ रहती  हैँ   या तलाक़शुदा हो ।
2 धारा 157 (1) (ख) : नाबालिक आवस्यक इस धारा के अन्तर्गत यह प्रतिबन्ध हैँ  कि  केवल वही नाबालिक अपनी ज़मीन बटाई पर दे सकता हैँ  जिसके पिता की मृत्यु हो चुकी हैँ ।
3 धारा 157 (1) (ग) : ऐसा व्यक्ति जो पागल हो या जड़ हो ।
4 धारा 157 (1) (घ) : विकलांग अथवा अशक्त - कोई भी ऐसा व्यक्ति जो अन्धेपन या अन्य शारीरिक दुर्बलता के कारण खेती - बाड़ी करने में  असमर्थ हो ।
5 धारा 157 (1) (ड) : विधार्थी : वह सभी विधार्थी  जिनकी आयु 25 वर्ष से अधिक न हो शिक्षारत हो,पिता की मृत्यु हो चुकी  हो । 
6 धारा  157 (1) (च) : प्रतिरक्षा कर्मचारी वह व्यक्ति  जो भारतीय गणराज्य संघ   जिनकी सेना के सदास्वरूप हो जैसे - स्थल सेना , नौ सेना , वायु सेना ।
7 धारा 157 (1) (छ) : निरोधक या कारावास भोगी ऐसा व्यक्ति को केन्द्रित कारागार अधिनियम के अन्तर्गत किसी सेंट्रल जेल मे अथवा ज़िला कारागार, उपकारागार आदि मे सजा काट रहा हो ।

भूमि संबधी महत्वपूर्ण संशोधन

भूमि संबधी महत्वपूर्ण संशोधन
कृषि भूमि के वसीयतनमो के संदर्भ मे भूमिधरों के लिए भूमि को  टुकडो मे विक्रय करने संदर्भ मे बहुत ही महत्वपूर्ण संशोधन वर्तमान विधि मे कर दिए गए हैँ । जमीदारी विनाश अधिनियम की धारा 168 समप्त कर दी गयी हैँ  । इस धारा मे यह दिया हुआ था कि चक्र 3.125 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल का हो तो उसका छोटे टुकडो मे विक्रय नहीं किया जा सकता हैँ । इसे उल्लधन मे किए गये अतरण अवैध माने जाते थे और भूमि  राज्य सरकार मे निहित हो जाती थी । बढते हुआ शहरीकरण ने इस प्रतिबन्ध को करीब - करीब नकार दिया था । 23 अगस्त 2004 से प्रभावी हुआ संशोधन ने इस प्रतिबन्ध को समाप्त कर दिया हैँ और अब कृषि भूमि के छोटे टुकडे भी बिना किसी अनुमति के विक्रय हो सकते हैँ । इस संशोधन के प्रभावी होने से पूर्व जो अन्तरण किए गए थे उनको भी इस शर्त के साथ विधिमान्य कर दिया कि संबधित व्यक्ति एक वर्ष कि अवधि के अंन्दर निर्धारित शुल्क  जमा कर दे । राज्य सरकार इस संदर्भ मे शुल्क, रीति और अवधि का निर्धारण करेगी । इस प्रकार जो विक्रय पर पुरानी धारा - 168 - क  के उल्लधन मे किए गए थे  उनको विधिमान्य करा पाना संभव हो गया हैँ , लेकिन यह छूट केवल एक वर्ष के लिए होगी । इसलिए इसका लाभ शीध् उठा लेना चाहिए ।