Thursday, 12 June 2014

वसीयत करने व इससे संबन्धित नियम के बारें आपसे विचार साझा करने का एक प्रयास

                       वसीयत करने का नियम    


जब कोई व्यक्ति अपनी किसी भी चल या अचल संपत्ति की वसीयत किसी यक्ति के नाम करता है ,तो कानून के अंतर्गत यह जरूरी है कि-वसीयत स्व -विवेक (अपनी बुद्धिसे भला -बुरा,सही -गलत ,ऊंच-नीच , सोच विचारकर )व पूरे होशो -हवास में कि जानी चाहिए |किसी व्यक्ति से पूरी तरह से स्वतंत्रविचार के बिना ( धोखा -धड़ी ,किसी दबाब या मजबूरी में ,नशाया बेहोशी की अचेत अवस्था में ) वसीयत पर हस्ताक्षर या अगूंठे का निशान करा लेने मात्र से वसीयत मान्य नहीं होती |वह पक्ष जो (किसी व्यक्ति के द्वारा गलत तरीके से वसीयत करने या करा लेने से )इस प्रकार की वसीयत किए जाने से प्रभावित होता है |इस प्रकार की गई वसीयत को अदालत में चुनौती देकर निरस्त करा जा सकता है |यदि वह यह प्रामाणिक कर सकने में सक्षम हो (यानि उसके पास कोई ऐसे प्रमाण या गवाही हो ) कि किसी वसीयत करने वाले ने अपनी स्वतंत्र राय और अपने पूरे होशो-हवास में हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान वसीयत पत्र पर नहीं किया है , तो निश्चित रूप से ऐसी वसीयत को निरस्त कराने के लिए न्यायालय में कार्यवाही कि जा सकती है |ऐसी स्थितिमें प्रभावित पक्ष मकान अथवा जमीन में अपना अधिकार भी सिद्ध कर सकता है 


किसी अन्य भाषा (दूसरी भाषा )में हस्ताक्षर कर्ता से से झूठी नहीं हो सकती वसीयत :-
                                        बॉम्बे हाइकोर्ट ने कहा है कि यदि कोई व्यक्ति आम तौर पर जिस भाषा का इस्तेमाल नहीं करता,अपनी वसीयत पर उसी भाषा में में हस्ताक्षर कर दे तों वह झूठी नहीं हो जाती |अदालत में जमीयत विवाद से जुड़े एक मामले में यह फैसला देते हुए उसे वैध करार दिया |जन्म से सिन्धी मेलवानी ने अपनी मात्रभाषा गुरुमुखी में हस्ताक्षर किया था |इसी तथ्य को लेकर वसीयत कि वैधता पर सवाल उठा था |दस्तावेज के मुताबिक 20 मार्च 1991 को मेलवानी ने बेटे गिरधारी मेलवानी को बांद्रा स्थित फ्लैट कि वसीयत लिखी |माँ के देहांत के बाद जब गिरधारी ने फ्लैट अपने नाम करने के लिए हाइकोर्ट में वसीयत की प्रामाणिक प्रति पेश की गई तो गिरधारी के भाई की पत्नी बीना ने उसे फर्जी करार देते हुए अर्जी दी उनका कहना था कि फ्लैट उसके स्वर्गवासी पति चंदू के पैसे से खरीदा गया और फ्लैट को हथियाने के लिए फर्जी वसीयत तैयार कि गई |उसने इसे साबित करने के लिए मेलवानी द्वारा पूर्व में दाखिल किए गए दो वकलतनामों में और फ्लैट के नामांकन के कागजात पर उर्दू में किए गए हस्ताक्षर का उदाहरण दिया | न्यायाधीश रोशन दलवी ने अपने फैसले में कहा कि ये तर्क पर्याप्त नहीं है चूंकि उर्दू भाषा अत्यधिक प्रचलित भाषा में है इसलिए इन दस्तावेजों में उर्दू में हस्ताक्षर कर सकती है

 वसीयत को फर्जी बताने वाला ही ही इसे साबित करे :- 

 उच्चतम न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि अगर कोई व्यक्ति किसी वसीयत को फर्जी कहता है तो दावा साबित करने की ज़िम्मेदारी भी उसी की होगी |उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय के इस आदेश केओ प्रस्ताव प्रियबन्दा बिड़ला की वसीयत के विवाद पर पड़ सकता है |न्यायमूर्ति अशोकभान और न्यायमूर्ति एस एच कपाड़िया की खंडपीठ ने इस प्रकार की व्यवस्था एक मामले की सुनवाई के दौरान दी जिसमे प्रीति नाम की एक महिला पहली वसीयत में अपनी संपाति भतीजे के नाम की थी पर दूसरी वसीयत में इसे अपनी बेटी के नाम कर दिया | खंडपीठ ने इस मामले पर अपना फैसला बेटी के पक्ष में यह कहते हुए सुनाया कि जो भी व्यक्ति वसीयत फर्जी होने का आरोप लगता है इस बात को सिद्ध करने ज़िम्मेदारी उसी कि होगी |प्रीति ने अपनी पहली वसीयत 1977 में तैयार कि थी जो सही तरह से कार्यान्वित थी पर इसे पंजीकृत नहीं किया गया था |प्रीति कि मौत के बाद उसकी पुत्री ने सारी संपत्ति पर अधिकार जताते हुए इस आशय का एक मुकदमा दर्ज किया जिसका पहली वसीयत से लाभ पाने वाले पक्ष ने यह कहते हुए विरोध किया कि दूसरी वसीयत फर्जी है और धोखा धड़ी कर के उसे तैयार किया गया है |निचली अदालत ने पहले पुत्री के मुकदमे को खारिज कर दिया लेकिन उच्च न्यायालय ने दूसरी वसीयत कि वैधता पर मुहर लगा दी |इसके बाद प्रीति के भतीजे ने उच्चतम न्यायालय में अपील कि जिसने उच्चतम न्यायालय के फैसले को कायम रखते व्यवस्था दी कि वसीयत के फर्जी साबित करने कि ज़िम्मेदारी उसी पक्ष कि है | जो इसे फर्जी कहता है | उल्लेखनीय है कि न्यायालय के इस फैसले का व्यापक असर बिड़ला और राजेंद्र लोढ़ा के बीच 5000 करोड़ कि संपत्ति पर कब्जे को लेकर चल रहे मामले पर पड़ सकता है |

4 comments:

  1. सर्, राजस्थान मे ये प्रचलन में है कि यदि पंचायत किसी व्यक्ति को वारिस मान लेती है(बिना किसी वसियत के,जब और कोई भी प्रत्यक्ष हकदार नही हो ) तो पंचायत के लैटर हेड को ही सही मान कर वारिस के नाम नामांतरण ट्रांसफर कर दिया जाता है।
    क्या इस प्रकार का कोई कानून है।
    यदि कोई हो तो बतावे।

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  2. वसीयत करने में पंचायत के क्या क्या अधिकार है

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  3. सर एक वसीयत पर क्या नाबालिग की मान्य हैं अथवा अमान्य ।यदि अमान्य हैं तो सम्बनधित कोई निर्णय अथवा नियम कानून शीघ्र अति शीघ्र बताये जाने की कृपा करे मेरा व्हाएट शप एवं सम्पर्क नम्बर 9219242976.7599149649

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  4. मेरे दादा जी बसीयत अपने नातियों क़े नाम कर गए है और बसीयत मे उपस्थित गबाहो का स्वस्थय ठीक नहीं है यदि गबाहो की मृत्यु हो जाती है तो क्या वसीयत समाप्त हो जयेगी परन्तु वसीयत रजिस्ट्रड है

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